શનિવાર, 24 નવેમ્બર, 2012
हमें आता नहीं
तेरे आने का पैग़ाम अब लायेगा कौन ?
नफ़रत की हम हिफाजत नहीं करते
આ જગ માં જુઓ બધા બેહાલ છે
कोई कुछ भी कहे औरत के बारे में यहां
सुलग उठता है जिगर
ગુરુવાર, 15 નવેમ્બર, 2012
फरिस्तो ने
चाँद भी कभी चाँदनी के लिए छूपा होगा
ખરવા નથી જવું
દરવાજા બંધ થઇ ગયા
हमसे ठुकारेये हुए लोग देखे नहीं जाते
मैं नशे में हूँ
महबूब
दिल की बात सुन ही लेंगे
તુજ વગર
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