રવિવાર, 23 ડિસેમ્બર, 2012
वक़्त वही है, हालात बदल गये लगते है
प्यार के वास्ते
મધુર સબંધો એમ કંઈ બંધાતા નથી
मेरी फुरकत में
રવિવાર, 16 ડિસેમ્બર, 2012
આ શરાબ પણ કંઈક આજ જૂની લાગે છે
वोह एक चिड़िया है
नहीं करते तबीब, नाईलाज दर्द की दवा
साकी तेरी आँखों में डूबना चाहता हूँ
उतर आये है बादल
हो गयी
बताओ जरा
ગુરુવાર, 6 ડિસેમ્બર, 2012
तेरी शादी पे निकला जनाज़ा देख ले
કેવા તે પ્રશ્નો
शज़र के पत्ते सूखे सूखे से क्यों है ?
ख्वाब को आंसू
मेरी जब रुखसत होगी
નથી ફેક્યા
तस्सवूर में भी गर आ जाओ
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