दीदार की ख्वाइश पूरी अगर हो जायेगी,
बार बार तू दीदार की इजाझत चाहेगी,
यकीन है मुझे, वो पर्दा रूख से हटते ही,
मेरी नयन कटार से खुद बच ना पायेगी,
नयन से जो नयन टकरा जायेगे एकबार,
उस पल से तेरी रूह को मेरी रूह भायेगी,
मैं तो हूँ भवरा, प्रेम वस फ़ौरन हो जाऊं,
तू मेरी चाहत में खुद-ब-खुद फस जायेगी,
परदा है परदे मे ही रहेने देना मुजे, राधे,
दीदार के बाद अकेली तू कैसे जी पायेगी????
नीशीत जोशी 11.08.13
આંખોએ કેટલા આંસુ વહાવ્યા,એ ભુલાય છે,
રાતોએ કેટલા સ્વપ્ન બગાડ્યા,એ ભુલાય છે,
આપવાને કાજે, પ્રેમ ના સ્વરૂપે, તાજા ફૂલો,
બાગોએ કેટલા ફૂલો કરમાવ્યા,એ ભુલાય છે,
પોતાના કહ્યા બાદ પારકા પણ બનાવી લીધા,
કેટલો વખત પ્રેમ કરી રડાવ્યા,એ ભુલાય છે,
ફૂલોનો પથ કહી બિછાવેલા કંટક હરએક રાહે,
અંધારે કયા કયા પથે ચલાવ્યા,એ ભુલાય છે,
અગણ્ય ઘાવો પણ સહ્યા છે બિચારા આ દિલે,
કયા કયા ઘાવે મલ્હમ લગાવ્યા,એ ભુલાય છે.
નીશીત જોશી 09.08.13
तू गर चाहे तो कर देना नायाब मुझे ,
यूँ तो याद ने कर रखा है बरबाद मुझे,
तस्सली दे कर के सवाल बने हो तुम,
तेरी रुखसत ने दे दिया है जवाब मुझे,
मजनूँ की आखो में थी सिर्फ जैसे लैला,
करता है वैसे ही तेरा चहेरा शाद मुझे,
मैंने मुहब्बत की है सिर्फ उस चाँद से,
पर लोग क्यों दिखाते है आफताब मुझे,
किसे किसे सुनाए ये दिल की दास्ताँ,
तेरे सिवा कोई न करेगा आबाद मुझे !
नीशीत जोशी 08.08.13
रातभर हमें कोई इतना सताता है,
अलग अन्दाज से प्यार जताता है,
छोटी छोटी बातो में रूठे अदा से,
मनाने पे ही वोह अपना बनाता है,
बर्फीले बदन पे थोडा हाथ जो रखे,
शोला भड़कने का डर से डराता है,
रश्क बातो से तेष दिलाता है हमें,
कुछ हम बोले तो आँसू बहाता है,
वोह आँसू बहाता है दरिया हो जैसे,
रो रो के ये दिल भी शोर मचाता है !
नीशीत जोशी 05.08.13
इन फिज़ा में पीने का मजा कुछ और है,
याद में रात जगने का मजा कुछ और है,
मैयकशी का माहोल अब बनने दो दोस्तों,
आँखों के जाम पीने का मजा कुछ और है,
साकी ने कहा महेफिल में जी भरके पीयो,
उस इल्तजा पे डूबने का मजा कुछ और है,
तवाझो देखकर खोल न पाये दिल का राज,
दिल ही दिल में मरने का मजा कुछ और है,
घर से निकले थे मंदिर की तरफ, साकीया,
तेरे मयखाने में आने का मजा कुछ और है,
मैय हे लाल और याद रहा चहेरा भी लाल,
लाल से बेहाल होने का मजा कुछ और है ....
नीशीत जोशी 01.08.13
નથી હું કોઇ આભ કે નથી તેમાનો તારલો,
નથી કોઇ દરીયો કે નથી નદીનો કાંઠલો,
નથી આવડતી એવી શબ્દોની માયાજાળ મને
ફક્ત છું 'નીશીત’ , રહેવા દો મને એક વ્યક્તી નીરાલો