कोई तो बात बनी है अभी,
पायल यहाँ खनकी है अभी,
देख के चाँद को गलिओं में,
तिश्नगी दिल में उठी है अभी,
वो वादियों में बन के खुशबू,
पूर-जोश यहाँ महकी है अभी,
जगा के ख्वाबो से, दोस्तों ने,
बताया चाँदनी खिली है अभी,
आग़ोश में भर लेते उसे मगर,
बामुश्किल झिझक हटी है अभी !!!!
नीशीत जोशी 28.01.15
ગુરુવાર, 5 ફેબ્રુઆરી, 2015
बामुश्किल झिझक हटी है अभी !!!!
कोई तो बात बनी है अभी,
पायल यहाँ खनकी है अभी,
देख के चाँद को गलिओं में,
तिश्नगी दिल में उठी है अभी,
वो वादियों में बन के खुशबू,
पूर-जोश यहाँ महकी है अभी,
जगा के ख्वाबो से, दोस्तों ने,
बताया चाँदनी खिली है अभी,
आग़ोश में भर लेते उसे मगर,
बामुश्किल झिझक हटी है अभी !!!!
नीशीत जोशी 28.01.15
मेरे दिल में ही बसता होगा
वह भी कहीं मेरे जैसे ही आहें भरता होगा,
पता करना वह मेरे जैसे ही तड़पता होगा,
ढूँढ लेना उसे किसी बागो में फूलो के बीच,
वह वहीँ खुशनुमा वादीओ में महकता होगा,
मुश्किल होगी काट पाना ये जिंदगी अकेले,
जैसे मैं मरता हूँ वह भी हर पल मरता होगा,
ढूंढना उसे महफ़िल में चरागों के आस पास,
यक़ीनन वह परवानो के जैसे जलता होगा,
ना ढूँढ पाओ अगर उसे हाथो की लकीरो में,
तो मान लेना वह मेरे दिल में ही बसता होगा !!!!
नीशीत जोशी 23.01.15
क्या करेगी ?
जलता चराग को हवा क्या करेगी ?
आईने के सामने अदा क्या करेगी ?
हो हौसला उड़ान का उन परिंदो को,
क़फ़स की पाबंधी नया क्या करेगी ?
जो हो फितरत से ही मसरूर यहाँ,
उसे अंजुमन की खफा क्या करेगी ?
तालीम पायी हो जिसने बेवफाई की,
माशूक़ होते हुए भी वफ़ा क्या करेगी ?
खाया हो धोका जिसने हरबार इश्क़ में,
जिंदगी उसे मौत दे के दगा क्या करेगी ?
नीशीत जोशी 18.01.15
ગુરુવાર, 15 જાન્યુઆરી, 2015
इंसानियत फिर से जहां में लानी है
उपरवाले की लीला बड़ी न्यारी है,
कहीं पे आग तो कहीं पे पानी है,
निकले घर से नादाँ बच्चे पढने,
पता न था वहीँ पे गोली खानी है,
अन्जाने लोग निकले जिंदगी लिए,
मौत न जाने किस आतंक से आनी है,
तोहमत नहीं यह उपरवाले तुझ पे,
पर यह तेरे ही नाम की बदनामी है,
जाग जा अब बता दे दहसतगर्ग को,
इंसानियत फिर से जहां में लानी है !!!!
नीशीत जोशी 10.01.15
दुआ दे गया कोई
आ कर हमें आज, दुआ दे गया कोई,
न था घर मेरा, पर पता दे गया कोई,
रखा था बीमार, किसीकी यादो ने हमें,
बनकर तबीब, आज दवा दे गया कोई,
मुमकिन नहीं, किसीको भूल जाना यूँ,
तड़पने की, फिर से सज़ा दे गया कोई,
इश्क़ की आग में, बची थी जो चिंगारी,
आ कर फिर से, उसे हवा दे गया कोई,
मुन्तज़िर थे उनके वादे पे एतबार करके,
बहार में भी पतजड़ का सिला दे गया कोई !!!!
नीशीत जोशी 03.01.15
યાદોના સહારે જીવતર લંબાઈ જાય છે
દર્દના ફૂલો પણ ખીલી કરમાઈ જાય છે,
ઝખમ પણ સમય જતા રુઝાઈ જાય છે,
છો ને નીકળે જાગરણ માં ગોઝારી રાત,
આશ સવાર ની દિલને અપાઈ જાય છે,
મનસૂબા બધા ક્યાં કોઈના થયા છે પુરા,
તડપતા દિલને વાત સમજાઈ જાય છે,
મરવાના વિચારે ટુંકાતી નથી એ જિંદગી,
યાદોના સહારે જીવતર લંબાઈ જાય છે,
ટેવાઈ જાય છે એ હૃદય પણ તૂટી તૂટીને,
આંસુઓ પણ આંખો માં જ સમાઈ જાય છે.
નીશીત જોશી 28.12.14
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