हो जाउँ मैं कहीं बदनाम तो मत रोना,
हो जाउँ इश्क़ में नाकाम तो मत रोना,
की थी मोहब्बत इबादत समझ के मैने,
खेल समझे उसे आवाम तो मत रोना,
किस्मत से होता है वो प्यार मुक्कमल,
आये तन्हाई का सलाम तो मत रोना,
सुनी हो महफिल और तिश्नगी दिल में,
साकी भी पीलाये न जाम तो मत रोना,
सुनाते हो सुखन अपने मोहब्बत की,
आ जाए मेरा कहीं नाम तो मत रोना !!!!
नीशीत जोशी 18.05.15
શનિવાર, 23 મે, 2015
मत रोना
हो जाउँ मैं कहीं बदनाम तो मत रोना,
हो जाउँ इश्क़ में नाकाम तो मत रोना,
की थी मोहब्बत इबादत समझ के मैने,
खेल समझे उसे आवाम तो मत रोना,
किस्मत से होता है वो प्यार मुक्कमल,
आये तन्हाई का सलाम तो मत रोना,
सुनी हो महफिल और तिश्नगी दिल में,
साकी भी पीलाये न जाम तो मत रोना,
सुनाते हो सुखन अपने मोहब्बत की,
आ जाए मेरा कहीं नाम तो मत रोना !!!!
नीशीत जोशी 18.05.15
बुलाने पे मेरे कभी तो आया करो,
बुलाने पे मेरे कभी तो आया करो,
अकेला छोड के यूँ ना जाया करो,
दीवारो पे लगी खामोश है तस्वीर,
कभी दास्ताँ में उसे भी लाया करो,
ज़ब्त में नहीं रहते जज्बात दिल के,
बेचारे दिल को ऐसे ना रुलाया करो,
दर्द भी पार कर लेता है हद अपनी,
ऐसे सितम अब मुझ पे ना ढाया करो,
तसव्वुर भी दम तोडता है महफिल में,
मौजूदगी जताने ही सही, आया करो !!!!
नीशीत जोशी 14.05.15
अब तुम्हारी तरह
गाता गझल जाऊं मैं अब तुम्हारी तरह,
या फिर संभल जाऊं मैं अब तुम्हारी तरह,
बता देना इतना की इंतझार करूँ तुम्हारा,
या फिर बदल जाऊं मैं अब तुम्हारी तरह,
करू यक़ीं तेरे इश्क़ पे या लुभावनी बातो पे,
या फिर फिसल जाऊं मैं अब तुम्हारी तरह,
कर के मुहब्बत, दिल से मैं अब नाचू गाउँ,
या फिर मचल जाऊं मैं अब तुम्हारी तरह,
याद रखू उन हसीं पलो को अपने जहन में,
या भूल के निकल जाऊं मैं अब तुम्हारी तरह !!!!
नीशीत जोशी 11.05.15
શુક્રવાર, 8 મે, 2015
इल्तज़ा
न जाने कैसे मैं आ गया खबर में,
चला हूँ मैं अभी ही नये सफर में,
आसाँ नहीं वो अन्जानी मंझिले,पर,
नझा से पहले पहुंच पाउँगा नगर में,
करें क्यों साबित मेरे उक़्बा को,
जब बेसुमार प्यार आया नजर में,
टिकी होगी निगाहें उनकी मुझ पे,
मिलते गये राहबर मुझे हर डगर में,
रखना ऐसी रहमत,ये इल्तज़ा है मेरी,
न हो जाऊं ख़ताकार किसी एब की असर में !!!!
नीशीत जोशी (नझा= last breath, उक़्बा= last stage) 07.05.15
હર શેરે તુજ નામ આવે છે
बहाना मिल गया
वादा तोडने का उसे बहाना मिल गया,
तन्हा छोडने का उसे बहाना मिल गया,
बरसना बारिश का, एक वजह बन गयी,
फिर सोचने का उसे बहाना मिल गया,
पुछा जो खोये हो किसके खयालो में तुम,
मुँह मोड़ने का उसे बहाना मिल गया,
रुख से जरा पर्दा हटाने को कह दिया,
कुछ बोलने का उसे बहाना मिल गया,
तारीफ़ क्या कर दी हमने उसके हुस्न की,
दिल रोंदने का उसे बहाना मिल गया !!!!
नीशीत जोशी 02.05.15
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