2122-2122-2122-212
हम तेरे कूचे में आए है मुसाफिर की तरह,
क्यों मुझे फिर तुम बुलाते हो वे काफिर की तरह,
गर तुझे कोई मेरा ही अक्स हैराँ भी करे,
तब मुझे आवाज देना तुम मुसव्विर की तरह,
आजमाते कह दिया था मुझको जाबिर भी कभी,
फिर रखा भी है मुझे कोई जवाहिर की तरह,
बन गया कादिर मेरा दिल अब हुनर कोई दिखा,
की लगे नादान ये दिल सबको नादिर की तरह,
महफिलो में तुम गज़ल कहते हो, साहिर तो नहीं,
लोग कहते है कि पढता है मुकर्रिर की तरह !
नीशीत जोशी
(काफिर -an infidel,sweetheart, मुसव्विर- painter,जाबिर- cruel,जवाहिर- jewels,कादिर- powerful ,नादिर- precious,साहिर -magician, मुकर्रिर- speaker
રવિવાર, 12 ફેબ્રુઆરી, 2017
आवाज देना तुम मुसव्विर की तरह
2122-2122-2122-212
हम तेरे कूचे में आए है मुसाफिर की तरह,
क्यों मुझे फिर तुम बुलाते हो वे काफिर की तरह,
गर तुझे कोई मेरा ही अक्स हैराँ भी करे,
तब मुझे आवाज देना तुम मुसव्विर की तरह,
आजमाते कह दिया था मुझको जाबिर भी कभी,
फिर रखा भी है मुझे कोई जवाहिर की तरह,
बन गया कादिर मेरा दिल अब हुनर कोई दिखा,
की लगे नादान ये दिल सबको नादिर की तरह,
महफिलो में तुम गज़ल कहते हो, साहिर तो नहीं,
लोग कहते है कि पढता है मुकर्रिर की तरह !
नीशीत जोशी
(काफिर -an infidel,sweetheart, मुसव्विर- painter,जाबिर- cruel,जवाहिर- jewels,कादिर- powerful ,नादिर- precious,साहिर -magician, मुकर्रिर- speaker
आँखों का जादू
1222-1222-122
दुपट्टा तेरा जो लहरा गया है,
सुरूर अब तो फ़िज़ा में छा गया है !
चमन में खुश्बुएं कलियों की महकीं,
बहारो का ये मौसम आ गया है !
चरागो ने कि रोशन महफिलें जब,
बुझे को भी तो जलना आ गया है !
कहाँ तक फिर वो छुपता महफिलों में,
नकाबो में भी पहचाना गया है !
नशा होता नहीं बादा से भी अब,
तेरी आँखों का जादू छा गया है !
नीशीत जोशी
हम क्या करें?
२१२ २१२ २१२ २१२
मंझिलें गर भटक जाए,हम क्या करें?
दिल कहीं फिर बहक जाए,हम क्या करें?
क्या हुई बात कोई बताता नहीं,
अश्क़ कोई छलक जाए, हम क्या करें?
तोड़ कर दिल मेरा अब सुकूँ है उसे,
जिक्र से दिल दहक जाए, हम क्या करें?
पाँव भी लडखडाये मेरी वस्ल पे,
हिज्र से दिल धडक जाए,हम क्या करें?
तोड़ कर फूल रौंदा गया पाँव से,
फिर भी दिल जो महक जाए,हम क्या करें?
प्यार कर के निभाने का दस्तूर है,
बेवफा बन सरक जाए,हम क्या करें?
शर्म आती है अब तो तुझे देख कर,
'नीर' गर दिल चहक जाए,हम क्या करें?
निशीथ जोशी 'नीर'
आराम नहीं है
1221-122 , 1221-122
किया प्यार है जब से, वो आराम नहीं है,
तेरी सोच के सीवा, मुझे काम नहीं है!
तेरी याद करेगी, परेशान मुझे अब,
उदासी के अलावा, वो इनाम नहीं है!
तेरे साथ कभी तो,मेरा नाम जुडेगा
मेरा प्यार बहुत है, जो बदनाम नहीं है !
मुझे दर्द मिला है, तेरे प्यार में दिलबर,
मगर प्यार पे कोई, वो इल्जाम नहीं है !
बहुत शाम बिताई, न समझे कभी तुम,
मुहब्बत का चलन वो, अभी आम नहीं है !
नीशीत जोशी
तो और क्या करता
1212-1122-1212-22
उसे मैं प्यार ना करता, तो और क्या करता,
करीब गर मैं न लाता, तो और क्या करता !
चिराग को भी बुझाकर, किया अंधेरा जब,
मैं अपना घर ना जलाता, तो और क्या करता !
मैंने उसे बुलाया, मगर न आया वोह,
मैं प्यार में न बुलाता, तो और क्या करता !
कहा उसे कि मेरे पास ही,रखो दिल तुम,
वो मुस्कुरा के न जाता, तो और क्या करता !
खयाल से ही उसे,प्यास फिर लगी होगी,
वो प्यास भी न बुझाता, तो और क्या करता !
कभी सितम तो, कभी ज़ख्म दे रहा था वोह,
मैं फिर सितम ना जताता, तो और क्या करता !
वो गुफ्तगू भी करे 'नीर', फिर करे हैराँ,
मैं गर करीब ना आता, तो और क्या करता !
नीशीत जोशी
तलबग़ार कर दिया जाए
1212-1122-1212-22
किया है प्यार तो इजहार कर दिया जाये,
तुम्हें भी इश्क़ का बीमार कर दिया जाये !
बना दिया है मेरे दिल को तुमने दीवाना,
चलो तुम्हें भी तलबग़ार कर दिया जाए !
चला न जाए ये दिल अजनबी के हाथों में,
मुहिब्ब को पहरेदार कर दिया जाये !
कमाल का है करिश्मा ये दिल लगाने का,
चलो उसे भी कलाकार कर दिया जाये !
खफा हुआ है जो दिल आज दूर हो कर भी,
ये शब को क्यों फिर दुश्वार कर दिया जाये !
नीशीत जोशी
આના પર સબ્સ્ક્રાઇબ કરો:
પોસ્ટ્સ (Atom)

