બુધવાર, 12 મે, 2010

हम कहते

अगर चांद न होता आसमां मे तो उसे हसीन कहते,

मगर चांद तो है बहोत दुर,

वोह खुद भी तो पास नही,

मीलते तो बहोत कु्छ उनसे मुलाकातो में कहते,

अगर बागोके फुल होते तो उसे उनकी खुश्बु कहते,

बाग भी है भरा पडा फुलो से ,

फुल की कीस्म भी है बहोत,

मीलते तो उसे फुलो से चुन चंम्पा या गुलाब कहते,

अगर रुठे जो हम उसे मनाने को कहते,

हम तो उसे किसीभी बहानेसे यहां आने को कहते ।

नीशीत जोशी

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