શનિવાર, 6 ઑગસ્ટ, 2011

कर ना पाओगे


समंन्दरकी गहरायी तक उतर ना पाओगे,
हमारे इस दर्द का अहेसास कर ना पाओगे,

जहां गीरती रोजीन्दा डरावनी बीजलीयां,
ऐसी राह से तुम कभी भी गुजर ना पाओगे,

आंखो में भर रखा है खोफनाक दरिया ऐसा,
ऐसी नीगाहो में तुम कभी ठहर ना पाओगे,

पाश पाश हो गया है नाजुक आयना हमारा,
ऐसे आयना को जोडके नया कर ना पाओगे ।

नीशीत जोशी Mumbai 30/07/11

પાર કરવી પડશે


સફર છે લાંબી એ પાર કરવી પડશે,
આવે તોફાની રાત પાર કરવી પડશે,

રાહ તો બનેલી હોય જ છે પથ્થરોથી,
પથ્થરોને મુકી બાજુ પાર કરવી પડશે,

ડરામણી રાતના સપના પણ ડરામણા,
હિમ્મતે વિતાવી રાત પાર કરવી પડશે,

નાસીપાસથનારનુ જીવન છે નાસીપાસ,
આત્મવિશ્વાસે જીન્દગી પાર કરવી પડશે,

નાવ પણ ડગમગે દરિયાયી તોફાનોમાં,
તોફાનોની વચ્ચે હાંકી પાર કરવી પડશે,

તડકો છાયો જીવનસીક્કાના બન્ને પાસા,
બન્નેને ભોગવી નીશીત પાર કરવી પડશે.


નીશીત જોશી Mumbai 27.07.11

कुछ हवा चली है


(सरला सुतारियाजीके सहयोग से बनी)
आज कुछ बात हुइ या तो आज कुछ हवा चली है ,
पीने से नशा हुआ या तो खुशनुमा कुछ हवा चली है

वो गर आ जाये तो आसमाँ को जमीं पे बीछा दे
नाच ऊठेंगे रात जवाँ होगी पुरवैया कुछ हवा चली है

साँसे बंध करके बादलो ने छुपाया तारों को आगोश मे
भुला बादल भी बरसने को बरसाती कुछ हवा चली है

गुनगुनाके बादल संभला वो चांद की रूमानी देखकर
चांद ने भी कहा चांदनी से मिलनकी कुछ हवा चली है

धरा पे चीराग मचल उठे हवाने भी रूख अपना मोडा
देखा जब चाँद को छत पर आने की कुछ हवा चली है

चांदनी मुश्कुराती बोल उठी चांद से '' आज पूर्णिमा है "
गुफ्तगू रोको आज आगोश मे लेनेकी कुछ हवा चली है ॥

नीशीत जोशी

निगाहोसे पीने का शोक


न पीने का शोक था न पीलाने का शोक था पर बेहोश हो गये,
कसुर उन कमसीन निगाहोका जीसे देखतेही मदहोश हो गये,

शबाब इस कदर चडा जान-ए-जीगरमें मयकदेसे उठनेके बाद,
पांव न डगमगाये और रस्ता धुंधला दिखतेही बदहोश हो गये,

जुगनुओसे कहा की उगादो नये चांद अंधेरोकी हुकुमतके पहले,
इल्जाम ना लगे मयखानेमें चांदनीसे मीलतेही पुरजोश हो गये,

सितम ओर न कर,पीला पीला के कमजोर न कर साकीया मेरे,
नाम बदनाम करेंगे लोग कहते हुए, देखतेही दिदारेदोश हो गये ।

नीशीत जोशी 17.07.11

निगाहोसे पीने का शोक


न पीने का शोक था न पीलाने का शोक था पर बेहोश हो गये,
कसुर उन कमसीन निगाहोका जीसे देखतेही मदहोश हो गये,

शबाब इस कदर चडा जान-ए-जीगरमें मयकदेसे उठनेके बाद,
पांव न डगमगाये और रस्ता धुंधला दिखतेही बदहोश हो गये,

जुगनुओसे कहा की उगादो नये चांद अंधेरोकी हुकुमतके पहले,
इल्जाम ना लगे मयखानेमें चांदनीसे मीलतेही पुरजोश हो गये,

सितम ओर न कर,पीला पीला के कमजोर न कर साकीया मेरे,
नाम बदनाम करेंगे लोग कहते हुए, देखतेही दिदारेदोश हो गये ।

नीशीत जोशी 17.07.11

અમને


ન આવ્યા કે ન બોલાવ્યા અમને,
પ્રેમમાં પડી હલબલાવ્યા અમને,

વરસાદમા પલળવુ લાજમી હતુ,
અશ્રુના દરિયામાં ડુબાળ્યા અમને,

વિજળીના કડાકાએ ન હતા ડર્યા,
ઝાંઝરના ઝંણકારે ડરાવ્યા અમને,

કાંટા લાગ્યા પથે પગ રંગ્યા રુધીરે,
રક્તરંજીત પગલા પડાવ્યા અમને,

પરેમ રમતના પારંગત હતા ઘણા,
જીતેલી દર બાજીએ હરાવ્યા અમને,

કહેલુ રુબરૂ નહી તો સપને આવજો,
સપનાની વાટે રાત જગાડ્યા અમને,

વાંક તેમા કદાચ મુજનો હોય નીશીત,
જુગનુની માફક તો ચમકાવ્યા અમને!!!!

નીશીત જોશી