રવિવાર, 13 મે, 2012
विचार
विचारो में कई बार हम अटक गये है,
किनारो के करीब आ के भटक गये है,
बिसात बीछा रखी है खेलने के वास्ते,
हारने के डर से खेल से छटक गये है,
नाच की ख्वाईश रखी पर आता नही,
आंगन टेढा कह कर भी मटक गये है,
धुप दिखाते है उसको सिर्फ दिखावे के,
जो तस्वीर बन दिवालो पे लटक गये है,
सामना ऐसा भी होता है विचारो का यहां,
उचाई पे चढ कर कभी नीचे पटक गये है ।
नीशीत जोशी 07.05.12
वोह कह गये थे
अश्को की छांव में मुद्दत से गुजर रही है जीन्दगी,
जब से वोह कह गये थे लौट आउंगा एक दिन....
अब उनके नाम हमने कर दी है पुरी यह जीन्दगी,
एक बार कहा था तुम्हे अपना बनाउंगा एक दिन....
ईन्तजार में खडे है उसी राह पर जहां छोड गये थे,
कहा था उसने इसी पथ पर ले जाउंगा एक दिन.....
आंखे बंध करने का उसने मसवरा दिया था कभी,
कहा था अपनी नजरो से जहां दिखाउंगा एक दिन....
लब्ज खामोश है मगर दिल उसी का नाम रटे,
कह कर गये थे दिल से जुबा खुलवाउंगा एक दिन.....
नीशीत जोशी 06.05.12
રવિવાર, 6 મે, 2012
लगता है
कोइ पास रहते हुए भी दुर लगता है,
कभी बेसुरा नग्मा भी सुर लगता है,
हमने गुजारी ताउम्र तेरी ही बाहों मे,
अब हर चहेरेमें तेरा ही नूर लगता है,
तुम सामने रहो या तो रहो परदे में,
तेरा साया भी चश्म-ए-बद्दुर लगता है,
तेरी खुदाइ को किस कद्र मै बया करु,
हर पथ्थर भी यहां कोहीनूर लगता है,
हुश्न भी बनाया तारीफ-ए-काबील यहां,
जहां जीसे भी देखता हूं, हूर लगता है ।
नीशीत जोशी 05.05.12
आज तलक
दीया जो था उसने हाथो में अपना हाथ,
आज तलक हमने किसीसे वो हाथ मीलाया नही है,
पहने थे जो कपडे जब थे उनके साथ,
आज तलक हमने उन कपडो को धुलवाया नही है,
चीराग जलाया था सामने रह महेफिलमें,
आज तलक उस चीराग को हमने बुझाया नही है,
हर सांस में बसा रखी है खुश्बु उनकी,
आज तलक वो खुश्बु को जहन ने भुलाया नही है,
मीली थी नजरो से जो नजर सरेआम,
आज तलक उनकी शयसे नजरो को हटाया नही है,
यूं तो यहां चाहनेवालो की तादात बढ गयी,
मगर हमने किसी ओर को दिल में बसाया नही है,
तेरी चौखट पर गीरे थे एक दिदार वास्ते,
तूजे छोड ओर किसी के आगे सर जुकाया नही है,
अब,ओ सीतमगर ! सीतम छोड, कर रहम,
रहमतगार 'नीशीत'ने किसी ओर को बनाया नही है ।
नीशीत जोशी 04.05.12
होता है
उठा वो हर परदा तेरा खास होता है,
हर किरदार में तेरा अहेसास होता है,
हर चहेरा दिखता है बहोत खुश पर,
दरअसल वो अंदर से उदास होता है,
प्यारकी नूमाइश करनेवाले है बहोत,
नीस्वार्थ करनेवाला तेरे पास होता है,
परदे के पी्छे रहके नीर्देश करता है तू,
कथन पर चले तो जीवन रास होता है,
अगली सांस भी आये तेरी इजाजत से,
कण कण में प्रभु तेरा ही बास होता है ।
नीशीत जोशी 01.05.12
કહી દઇએ
અમે એક ઓસની બુંદને પણ વરસાદ કહી દઇએ,
થતા મૌન ના સંવાદ ને પણ કોઇ સાદ કહી દઇએ,
છો ને વ્યંગ કરી હસતા રહો મુજ પર ક્યારેક પણ,
અમે થતા આવા એ વ્યંગ ને પ્રતિસાદ કહી દઇએ,
અભણ રહ્યા એ પ્રેમ કેરા આનંદના આ ભણતરમાં,
ઉમેરવાનુ કહેતા કહેતા એને અમે બાદ કહી દઇએ,
આમ તો મળે છે અપાર પ્રેમ લોકોની પાસ ગયેથી,
અરીસો સામે જોતા તેને અમે અપવાદ કહી દઇએ,
નાત-જાત,હદ-સરહદ,ઉંચ-નીચ ની પાર છે પ્રેમ,
ન આવડતી પ્રેમભાષાનો પણ અનુવાદ કહી દઇએ.
નીશીત જોશી 29.04.12
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