બુધવાર, 8 ફેબ્રુઆરી, 2012

કોઇ કીમત નથી


સૂરજ વગર સવાર ની કોઈ કીમત નથી,
લહેરો વગર કિનાર ની કોઈ કીમત નથી,

વિશ્વાસ ઉપર દુનિયા કાયમ હોય તે છતાં,
લખાણ વગર કરાર ની કોઇ કીમત નથી,

ઇશ્વરને પામવાની ઇચ્છા તો હોય ઘણાને,
શ્રદ્ધા વગરની પુકાર ની કોઇ કીમત નથી,

એક આત્મવિશ્વાસે દરિયો પણ તરી જવાય,
આ પાર વગર પેલી પાર ની કીમત નથી,

આ દુનિયા થઇ ગઇ છે એવી તે હોશિયાર,
અહીં ઘાવ વગર વાર ની કોઇ કીમત નથી.

નીશીત જોશી

સોમવાર, 6 ફેબ્રુઆરી, 2012

बस तु, तु ओर तु


वो तेरा नूरानी चहेरा,
उन पे केशूओ का पहेरा,
नयनो में सजा काजल,
आसमां भरा हो जैसे घने बादल,
मांग पे लगा सीदूर,
जैसे छीपा हो कोई दुर्र,(pearl)
उफ्फ! तेरी हर अदा,
याद आ जाये सदा,
खामोश आसमान, मायूस परिन्दे,
विरान वादियां,
सर्द आलम,
और तुम्हारी यादो के सिलसिले,
उफ्फ!!!!!!
उल्फत बना जीना,
जैसे हो ताज बीना मीना,
तु नही तो कुछ भी नही,
बस तु, तु ओर तु,
जहा भी नजर करू, बस तु !

नीशीत जोशी

શનિવાર, 4 ફેબ્રુઆરી, 2012

दिया है हुश्न


दिया है हुश्न खुदाने उसकी हिफाजत कर,
रहे बरकरार अपना प्यार ये ईबादत कर,

राहदार बनके आयेगा हर मुश्कील राहमें,
करिश्मा जो दिखाये उसकी इनायत कर,

जो हो रहा है मानले हे ये करमो का फल
रहनूमा के सामने न उनकी शिकायत कर,

औकातसे ज्यादा दिया फिरभी जो कम हो,
गलती मान ले खुदकी न कभी बगावत कर,

चंद लोग जिन की फितरत है नफरत बोना,
उन सभी को महोब्बत बांटने की हिदायत कर ।

नीशीत जोशी

શુક્રવાર, 3 ફેબ્રુઆરી, 2012

હું


રૂધીરના આંસુ પી રહ્યો છું હું,
તુજની યાદે જીવી રહ્યો છું હું,

સળગી ના જાય મોઢુ ખોલ્યે,
માટે જ હોઠો સીવી રહ્યો છું હું,

અપેક્ષાની કોઇ સીમા ન હોય,
દર્શન અપેક્ષા કરી રહ્યો છું હું,

ઉંડાણ ન જાણ્યુ કુદ્યો દરિયામાં,
તુજ ભરોશે જ તરી રહ્યો છું હું,

દફનાવજે તુજ હસ્તક કબરમાં,
આજીવન પ્રેમી બની રહ્યો છું હું.

નીશીત જોશી

डर से


हर तरफ करी रोशनी उनसे साथ छूटने के डर से,
बैठे ही रह गये महेफिलमें उनके ऊठने के डर से,

जमी पे खडे थे और मीला आसमान हमे तौफे में,
उची ऊडान न ली मैने उनकी सांस घुटने के डर से,

हर ख्वाईश पूरी करते रहे जो कहते गये वोह हमसे,
वो दर्द में भी हसते हसाते रहे उनके रुठने के डर से,

महोब्बत कि राह पर नीकल पडे थे दोनो साथ साथ,
हमने आयना सा दिल संभाल रखा फूटने के डर से,

बेखबर सोये थे वोह हमारे सीने पे रख के सर अपना,
हमने धडकन भी रोक ली उनकी नींद तूटने के डर से ।

नीशीत जोशी

બુધવાર, 1 ફેબ્રુઆરી, 2012

हमे सिखाया


किसी ने हमे चहेकाना सिखाया,
किसी ने हमे मुश्कराना सिखाया,

ऐसे शायर न थे कभी भी हम तो,
प्यारने हमे वो शायराना सिखाया,

दिदारके लिये रखी थी तस्वीर वो,
उन्की शयने हमे बहेकाना सिखाया,

बागबान बनने पहोंचे जो बाग हम,
वहां फूलोने हमे महेकाना सिखाया,

तीनका बून बूनके घर को, परिन्दोने,
कैसे बनाते है वो आशीयाना सिखाया ।

नीशीत जोशी